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मातृभाषा

मातृभाषा

मातृभाषा

तुम हिंदी से क्यों शर्माते हो
अंग्रेजी को क्यो अपनाते हो
सब भाषा से हैं प्यारी ।
स्वाभिमानी की है निषानी ।
देेष की उन्नति की
इसने लिखी कहानी ।
सब भाषाओँ  की है महारानी
अन्य भाषायें इसके आगे भरे पानी
अंग्रेजी  उर्दू और बांगला राजस्थानी ।
सब भाषाओँ  की है ये नानी।
भारत के गौरव की निशानी।
गाॅधी नेहरु पटेल की वाणी ।
वाजपेयी ने रची राष्ट्रभाषा  हिंदी में
भाषण देकर नई कहानी
लेकिन दुख इस बात का है
आज के भारतीयो ने इसे भुलाया है।
माॅ जैसे प्यारे शब्द को मम्मी और माॅम बनाया है।
लेकिन याद रखना ये इंसान
जिस प्रकार माॅ के बिना संसार अधूरा है और उसी प्रकार बिना मातृभाषाके द्वेष  अधूरा है।

कु0 कविता

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