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बेटी

बेटी

ईश्वर की दी हुई सौगात है बेटी
नेक,नाज़ुक,नर्म सा जज़्बात है बेटी
जनक के घर मे है जैसे शाम खुशनुमा
घर पिया के होती शुभ प्रभात है बेटी
है सुगम संगीत की स्वर लहरियां मीठी
सरल शब्दों में रचे नग्मात है बेटी
आती है कयामत मे बेटी की शक्ल में
खुद मे सजोये पूरी कयामत है बेटी
सदियों पुरानी आज कहावत मिटाइये
अब तो मत कहिये पराई जात है बेटी

By – Neha
Department of B.ED.
Uttaranchal College of Education (UCE)

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