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सामाजिक सद्भाव में युवाओं का योगदान

सामाजिक सद्भाव में युवाओं का योगदान

आजकल समाज में सद्भाव का अभाव नजर आता है। सामाजिक सद्भाव बने रहने से समाज उन्नति करता है और सद्भाव के बिगड़ने से समाज पतनशील बनता है। अब प्रश्न उठता है कि इस सामाजिक सद्भाव को किस प्रकार लाया जाए?

सामाजिक सद्भाव उत्पन्न करने में युवाओं का योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है। युवाओं में ऊर्जा होती है। वे किसी भी असंभव काम को संभव कर सकते हैं। नई पीढ़ी को ही समाज की पुनर्रचना करनी है। यदि हम अपने समाज के युवाओं के मन में अच्छे विचार पैदा करेंगे तो निश्यच ही उसका फल भी अच्छा ही मिलेगा। युवा सुसंस्कृत होकर शिष्ट नागरिक बनेंगे। ऐसे शिष्ट नागरिक एक सभ्य समाज का निर्माण करेंगे। जब वेे ऐसा काम करेंगे तो सामाजिक सद्भाव तो स्वयं उत्पन्न हो जाएगा।

समाज के सद्भाव को बिगाड़ने में सांप्रदायिकता की भावना, स्वार्थप्रवृत्ति तथा क्षुब्ध राजनीतिक इच्छाएँ आदि आती हैं। हमें इससे ऊपर उठना होगा। समाज में समरसता उत्पन्न करनी होगी। यह काम युवा वर्ग भली प्रकार कर सकता है। हमें युवाओं की ऊर्जा का सदुपयोग करना चाहिए।

युवा संगठित होकर उन तत्वों से संघर्ष कर सकते हैं जो सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ते हैं। उन्हें मानवतावादी दृष्टि से सोचना होगा तथा तद्नुरूप कार्य करना होगा। हमें युवाओं पर विश्वास करना होगा, तभी वे दृढ़तापूर्वक कार्य कर सकेंगे।

समाजिक सद्भाव उत्पन्न करने में युवा महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर सकते हैं। युवाओं में उत्साह होता है। वे जो ठान लेते हैं उसे क्रियान्वित करने में सफल भी रहते हैं। समाज का सद्भाव बिगाड़ने में अराजक एवं सांप्रदायिक तत्त्व बढ़-चढ़ कर भाग लेते हैं। युवा इन तत्त्वों पर भली प्रकार काबू पा सकते हैं।

समाजिक सद्भाव को बिगाड़ने का काम कुछ सिरफिरे लोग करते हैं। ऐसे लोग कुछ युवाओं को ही भ्रमित करके अपने नियंत्रण में ले लेते हैं। इनमें कुछ युवा बेरोजगार होते हैं अतः थोड़े से प्रलोभन में इनको ले लिया जाता है। ऐसे लोगों को कुछ राजनेताओं का संरक्षण भी मिल जाता है। वास्तव में वे राजनेता कम दादा किस्म के अधिक होते हैं। ऐसे लोग समाज का सद्भाव बिगाड़कर अपना प्रभुत्व स्थापित करते हैं। यदि सभी ओर शांति का माहौल बना रहे तो भला इनको कौन पूछे। पहले ये सामाजिक वातावरण में विष घोलते हैं, फिर अपनी कुमानसिक्ता से समाज को भ्रमित करते हैं। ऐसे लोगों से युवा भली प्रकार निपट सकते हैं। यदि उन्हें सही मार्गदर्शन मिले तो उनकी शक्ति सही दिशा में लगाई जा सकती है।

युवाओं ने अनेक अवसरों पर समाज में सद्भाव उत्पन्न करने का काम किया भी है। बदलते समय और मूल्यों के अनुसार नया समाज बनाना होगा। इस नव-निर्माण के काम में युवाओं का योगदान वांछनीय है। यदि नई पीढ़ी समाज में सद्भाव कायम रखने में योगदान दे सकी तो यह देश के लिए शुभ संकेत होगा। भविष्य में इसी पीढ़ी को इस समाज में रहना है अतः सामाजिक सद्भाव उत्पन्न करना उनके अपने हित की बात है। युवाओं को इसमें बढ़-चढ़ कर भाग लेना होगा। जिससे समाज मे एक नई दशा एवं दिशा प्राप्त होगी।

By -Asst. Professor – मौ0 अहमद
Department -EDUCATION
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