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उच्च शिक्षा की चुनौतियां

उच्च शिक्षा की चुनौतियां

शिक्षक-प्रशिक्षकों की गुणवत्ता से ही आगे चलकर अन्य सभी क्षेत्रों में गुणवत्ता का स्तर निर्धारित होता है। भारत में इस समय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थाओं की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। यहां व्यापारीकरण तेजी से बढ़ा है और इससे निपटने के प्रयासों के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। अध्यापकों की गुणवत्ता में कमी रोकी जानी चाहिए। पढ़ा वही सकता है जिसे नया सीखने में रुचि हो, जो अपने अध्यापन में परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन करने को तत्पर रहता हो! मौजूदा दौर में हर एक अध्यापक का प्रशिक्षण आधुनिक विधियों द्वारा होना आवश्यक है।
आज के संचार-तकनीकी युग में ‘कैसे पढ़ाएं’ एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण प्रश्न बन गया है। सीखने के स्नोतों का विस्तार हुआ है। उनमें बदलाव भी आता जा रहा है। अब वही सिखा सकेगा जो स्वयं लगातार सीखता रहे। हर नई संचार तकनीक और सुविधा और उपकरण या गैजेट का उपयोग लाभकारी होगा, मगर इसके उपयोग के साथ संभावित दुरुपयोग से अध्यापक का परिचित होना भी आवश्यक होगा।
केंद्र सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी अनेक सुधार कर रही है। यदि राज्य सरकारें भी अभी से अपनी व्यवस्था चाक-चौबंद करने में लग जाएं तो निश्चित ही अगले तीन-चार वर्ष में शिक्षा के क्षेत्र में सभी को व्यापक सुधार नजर आने लगेंगे। इसके लिए अध्यापकों की नियुक्तियों को गति दी जाए, मध्यान्ह भोजन व्यवस्था को संभाला जाए और पाठ्यक्रम परिवर्तन में तेजी लाई जाए, संचार एवं तकनीकी उपयोग के लिए प्रेरित किया जाए।
लोगों में विश्वास जगाया जाए कि स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने का हरसंभव प्रयास होगा। स्कूली शिक्षा में सुधार की चर्चा पर अक्सर प्रतिक्रिया कुछ यूं होती है कि यह तो लगातार कहा जाता है, मगर स्थिति तो बद से बदतर होती जा रही है। इसे बदलने के लिए स्कूली शिक्षा को पहले सुधारना होगा तभी उच्च शिक्षा में बड़े स्तर पर गुणवत्ता सुधार संभव है।
निधियों का आवंटन तथा पारदर्शिता : एक बड़ी चुनौती
 प्रस्तावित विधेयक के कारण उत्पन्न अधिक विवादित मुद्दों में केंद्र सरकार का वह निर्णय भी शामिल है जिसके अंतर्गत उच्च शिक्षा संस्थानों के लिये मानव संसाधन विकास मंत्रालय या एक अलग निकाय हेतु अनुदान देने वाली शक्तियों को स्थानांतरित करने का फैसला लिया गया है।
 UGC बहुत सी कार्यवाहियों के साथ-साथ अब तक अनुदान देने का कार्य भी करती रही है और कमियाँ चाहे जो भी हो इसने अनुदान देने के निर्णयों को राजनीतिक विचारों से अलग रखना सुनिश्चित किया है।
 निधियों के आवंटन तथा पारदर्शिता के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए यह अब HECI की सलाहकर समिति पर निर्भर करेगा।

By ASSISTANT PROFESSOR – Ms. SANDHYA
Department – Education
UCBMSH Magazine – (YouthRainBow)
UCBMSH WEBSITE – Uttaranchal (P.G.) College Of Bio-Medical Sciences & Hospital
UCBMSH B.ED WEBSITE – Uttaranchal College of Education
UCBMSH NURSING WEBSITE – College Of Nursing UCBMSH

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